याद तब करते हो करने को न हो जब कुछ भी
और कहते हो तुम्हें इश्क़ है मतलब कुछ भी
अब जो आ आ के बताते हो वो शख़्स ऐसा था
जब मेरे साथ था वो क्यूँ न कहा तब कुछ भी
वक्फ़े-वक्फ़े से मुझे देखने आते रहना
हिज्र की शब है सो हो सकता है इस शब कुछ भी
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