अब नहीं फ़िक्र इस ज़माने की
मेरी कोशिश है सब भुलाने की
कितने दिन लग गए भुलाने में
क्या ज़रूरत थी यार आने की
जान से फिर चला गया लड़का
इक न तुम ने सुनी दिवाने की
मेरी महफ़िल में आ के बैठ गई
मेरी हिम्मत नहीं उठाने की
बात दिल की अभी कही भी नहीं
उस ने तैयारी कर ली जाने की
जो मिरी होने वाली थी लड़की
बा'द में हो गई ज़माने की
उस का पहले ठिकाना होता था
अब नहीं वो रही ठिकाने की
— Vaseem 'Haidar'















