गाने नुसरत के हाए बारिश में

उस पे इक प्याली चाय बारिश में

भींगता जिस्म थरथराता हुस्न
और ख़ाली सराए बारिश में

कितना अच्छा हो साथ हो हम तुम
और हो इक प्याली चाय बारिश में

झूम उट्ठे फ़ज़ा वो लड़की जब
प्रेम धुन गुनगुनाए बारिश में

काश ऐसा हो, पास आने के
वो भी सोचे उपाय बारिश में

गर इजाज़त हो तो तिरे लब से
पी लें दो घूंट चाय बारिश में

यूँ तो हर शै हसीं है पर उस का
वो बदन आए हाए बारिश में

उस की गिनती मुनाफ़िक़ों में हो
जो भी ख़ुद को बचाए बारिश में

उस के पायल के छन-छनाहट की
याद 'कातिब' सताए बारिश में

— Ved prakash Pandey

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