jinko ghazalon men likkhe hain paagal hai | जिनको ग़ज़लों में लिक्खे हैं पागल है

  - Vikas Sahaj

जिनको ग़ज़लों में लिक्खे हैं पागल है
उनको शायद हम लगते हैं पागल है

तुमने पागल बोला तो अफ़सोस नहीं
जाने किस किस से सुनते हैं पागल है

औरों से उम्मीद ही कैसे रखते हम
दोस्त हमारे ही कहते हैं पागल है

आगे मेरे तो ता'रीफ़ें करते हैं
आपस में बातें करते हैं पागल है

सब के नाम को उनके पद के साथ लिखा
हम जैसों को बस लिखते हैं पागल है

मैं शायद सचमुच पागल हूँ इस ख़ातिर
पागल भी मुझको कहते हैं पागल है

  - Vikas Sahaj

Aah Shayari

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