कोई शिकवा न ही गिला कोई
यूँँ ही इक दिन चला गया कोई
अब फ़क़त फैसले सुनाता है
पहले करता था मशवरा कोई
ख़त में बस इतना ही लिखा उसने
आपने ख़त नहीं लिखा कोई
ज़र्द पत्ते सा गिर रहा हूँ मैं
हो रहा है कहीं हरा कोई
एक दिन मैंने ली किसी की जगह
आ गया अब मिरी जगह कोई
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