किसी नज़र में किसी बाम पर सितारा नहीं
ये कैसी शब है कोई मो'तबर सितारा नहीं
फ़ज़ा का रंग वही है जो आप देखते हैं
ये अपनी आँख चमकती है सर सितारा नहीं
वो आँख बंद है और रास्ते नहीं खुलते
भटकते फिरिए निशान-ए-सफ़र सितारा नहीं
सियाह शब में चमकता हूँ जिस तरह से 'कुमार'
मेरे ख़मीर में क्या है अगर सितारा नहीं
— Vipul Kumar















