is dhamak se tu agar paanv rakhega mujh men | इस धमक से तू अगर पाँव रखेगा मुझ में

  - Vipul Kumar

इस धमक से तू अगर पाँव रखेगा मुझ में
फिर कोई चश्मा नया फूट बहेगा मुझ में

क्यूँँ न कुछ शोर उठाऊँ कि वो ख़ामोश-मिज़ाज
बे-इरादा ही सही ध्यान तो देगा मुझ में

घर में चलते हुए डरता हूँ कि कोई साया
आ के टकराएगा और आ ही बसेगा मुझ में

इस क़दर तंग है दिल अपनी परेशानी से
सैर अच्छी है मगर कौन रहेगा मुझ में

वक़्त झाड़ेगा नए हिज्र के मौसम का शजर
और इक लम्हा कोई आन गिरेगा मुझ में

मेरे नाज़ुक मेरी मिट्टी पे बहुत रक़्स न कर
ध्यान की रुत है कोई फूल खिलेगा मुझ में

  - Vipul Kumar

Aahat Shayari

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