मेरे जिया की मेरे पिया को तुम्हीं सुनाओ निगोड़ी अँखियों

ये चुप का पत्थर पड़ा है दिल पर इसे हटाओ निगोड़ी अँखियों

बरसती जाओ बरसती जाओ बरसती जाओ बरसती जाओ
कि दिल से सब कुछ बहा के उस की जगह बनाओ निगोड़ी अँखियों

उसी को देखो उसी को देखो उसी को देखो उसी को देखो
कि देखने का है काम तुम को सो काम आओ निगोड़ी अँखियों

मुआँ ये दर्पण मुआँ ये दर्पण मुआँ ये दर्पण मुआँ ये दर्पण
मुझे इसी की नज़र लगी है इसे हटाओ निगोड़ी अँखियों

वो उठ गया है वो चल दिया है वो जा रहा है चला न जाए
उसे मनाओ उसे मनाओ उसे मनाओ निगोड़ी अँखियों

— Vishal Bagh

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