फ़रेबी दौर में भी सच को दिल में रखते हुएचराग़-ए-रस्म-ए-वफ़ा को जला के आया थाभले ही झूठा लगा तुझ को मेरा इश्क़ मगरमैं तेरे पास हवस को हरा के आया था— Viru Panwar Viyogi