भूल कर नइँ भूल पाएगी मुझे

तू अकेले गुन गुनाएगी मुझे

जान जाएगी मेरी भी जान अब
और तू भी जान जाएगी मुझे

मौत से तो मैं मरूँगा ही नहीं
ज़िंदगी ही मार खाएगी मुझे

मेरा पेशा शा'इरी है साहिबा
इश्क़ करना तू सिखाएगी मुझे

ऑनलाइन है अभी तो चाँद भी
यार कैसे नींद आएगी मुझे

मारने मुझ को लगेंगे लोग जब
शा'इरी ही तब बचाएगी मुझे

मीर ग़ालिब और तुलसी की तरह
यार शोहरत कब बुलाएगी मुझे

ले रहा हूँ शा'इरी की आबरू
बात ये भी अब रुलाएगी मुझे

चाहती है वो मुझे अब छोड़ना
छोड़ दी आशा,मनाएगी मुझे

— Vijay Potter Singhadiya

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