door se hi bas dariyaa dariyaa lagta hai | दूर से ही बस दरिया दरिया लगता है

  - Waseem Barelvi

दूर से ही बस दरिया दरिया लगता है
डूब के देखो कितना प्यासा लगता है

तन्हा हो तो घबराया सा लगता है
भीड़ में उस को देख के अच्छा लगता है

आज ये है कल और यहाँ होगा कोई
सोचो तो सब खेल-तमाशा लगता है

मैं ही न मानूँ मेरे बिखरने में वर्ना
दुनिया भर को हाथ तुम्हारा लगता है

ज़ेहन से काग़ज़ पर तस्वीर उतरते ही
एक मुसव्विर कितना अकेला लगता है

प्यार के इस नश्शा को कोई क्या समझे
ठोकर में जब सारा ज़माना लगता है

भीड़ में रह कर अपना भी कब रह पाता
चाँद अकेला है तो सब का लगता है

शाख़ पे बैठी भोली-भाली इक चिड़िया
क्या जाने उस पर भी निशाना लगता है

  - Waseem Barelvi

Parinda Shayari

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