mujhe taqseem tukḍon men jo karna hai to bismillah | मुझे तक़सीम टुकड़ों में जो करना है तो बिस्मिल्लाह

  - Amaan Haider

मुझे तक़सीम टुकड़ों में जो करना है तो बिस्मिल्लाह
मिरे लाशे के ऊपर से गुज़रना है तो बिस्मिल्लाह

मिरा दिल मिस्ल-ए-सहरा है, यहाँ काँटे हैं पत्थर हैं
अगर फिर भी तुम्हें इस
में उतरना है तो बिस्मिल्लाह

बहुत इल्ज़ाम हैं मुझपर किसी अहसान की मानिंद
तुम्हें भी गर कोई अहसान करना है तो बिस्मिल्लाह

उठाना बोझ लोगों का अज़ल से काम है मेरा
तुम्हें भी बोझ अपना मुझ पा धरना है तो बिस्मिल्लाह

तुम्हें तक़लीफ़ होगी गर मुझे हासिल हुई राहत
नमक तुमको मिरे ज़ख़्मों में भरना है तो बिस्मिल्लाह

हर इक वा'दा गिना सकता हूँ उँगली पर तुम्हारा मैं
मगर वादों से अब तुमको मुकरना है तो बिस्मिल्लाह

मुक़फ़्फ़ल खिड़कियाँ हैं, और पंखा भी है रस्सी भी
'अमान' आओ तुम्हें ऐसे ही मरना है तो बिस्मिल्लाह

  - Amaan Haider

Promise Shayari

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