यूँँ परेशान है उदू मेरा

सर न झुक पाएगा कभू मेरा

ये गुमाँ है मेरे रक़ीबों को
इश्क़ होगा न सुर्खरू मेरा

है यक़ीं मुझ को बा'द मरने के
तज़किरा होगा चार-सू मेरा

मैं इसी बात पे तो फ़ाकिर हूँ
शहर तेरा है और तू मेरा

जाने दिल तुम को छेड़ने के लिए
नाम लेते हैं क्यूँ सभू मेरा

याद बनती गई तेरी ख़ंजर
क़ल्ब बनता गया गुलू मेरा

आज क्योंकर ग़ज़ल लिखे न 'अमान'
इश्क़ है मेरे रूबरू मेरा

— Amaan Haider

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