माँ को गले से तुम लगाओ, घर से निकलो
बाबूजी का आशीष पाओ, घर से निकलो
लेकर खड़ी है तीर बाहर की ये दुनिया
तुम ढाल हाथों में उठाओ, घर से निकलो
हारे हुए दिखते हैं सब घर से निकलकर
तुम जीत का इक गीत गाओ, घर से निकलो
क्या? कह रहे थे आ रहा बस दो मिनट में
कब से खड़ा हूँ जल्दी आओ, घर से निकलो
कोई लगा ना दे नज़र तुमको मिरी जाँ
तुम काली बिंदी इक लगाओ, घर से निकलो
पानी कुओं का सुख चुका है मेरे यारों
अब कुछ करो दरिया बचाओ, घर से निकलो
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