Mahboob Khan Raunaq

Mahboob Khan Raunaq

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Mahboob Khan Raunaq shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Mahboob Khan Raunaq's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Ghazal
संग-दिल है असर उस पे होगा नहीं क़िस्सा-ए-ग़म सुनाने से क्या फ़ाएदा
कम तो होती नहीं सोज़िश-ए-ज़िंदगी आँसूओं में नहाने से क्या फ़ाएदा

राज़ रखते हो क्यों साफ़ फ़रमाइए दिल की बातें छुपाने से क्या फ़ाएदा
आस दे दे के मायूस करते हो क्यों यूँ किसी को सताने से क्या फ़ाएदा

अपनी तिश्ना-लबी की शिकायत नहीं ये तो साक़ी-गरी की भी तौहीन है
मय-कशी का तक़ाज़ा समझिए ज़रा क़तरा-क़तरा चखाने से क्या फ़ाएदा

ख़ौफ़-ए-सय्याद है बिजलियों का है डर ना-मुवाफ़िक़ हवा है फ़ज़ा पुर-ख़तर
जब मुख़ालिफ़ है इतने ज़मीं आसमाँ फिर नशेमन बनाने से क्या फ़ाएदा

आमद-ए-फ़स्ल-ए-गुल हो मुबारक तुम्हें अहल-ए-गुलशन मगर ये तो फ़रमाइए
जो किसी के गले की न ज़ीनत बने ऐसी कलियाँ खिलाने से क्या फ़ाएदा

चाँदनी की तरह वजह-ए-फ़रहत बने हुस्न से कुछ ज़िया-ए-मोहब्बत मिले
बर्क़ बन कर जला दे जो दुनिया मिरी ऐसा जल्वा दिखाने से क्या फ़ाएदा

राज़ इस में नहीं कोई इस के सिवा मैं जो ख़ामोश हूँ 'रौनक़'-ए-बे-नवा
जिस से फ़रियाद है वो तो सुनता नहीं फिर जहाँ को सुनाने से क्या फ़ाएदा
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Mahboob Khan Raunaq
क्या सितम है कि सितम हम पे वो कर जाते हैं
अपने साए से जो तन्हाई में डर जाते हैं

लौट के आना ही पड़ता है उन्हें सैंकड़ों बार
तेरे कूचे से जो इक बार गुज़र जाते हैं

ग़म के मारों को भी आती है कभी ख़ुद पे हँसी
कभी सहरा में भी कुछ फूल बिखर जाते हैं

याद रह जाते हैं अहबाब के कुछ लुत्फ़-ओ-करम
दिन मुसीबत के बहर-हाल गुज़र जाते हैं

पारसाई न जताओ कि ये है मय-ख़ाना
अच्छे अच्छे यहाँ शीशे में उतर जाते हैं

तुम पशेमाँ न हों तुम पर कोई इल्ज़ाम नहीं
मरने वाले कभी बे-मौत भी मर जाते हैं

मेरी बिगड़ी हुई तक़दीर बने या न बने
उन के बिखरे हुए गेसू तो सँवर जाते हैं

दफ़्न हो कर भी कहीं दबते हैं अरमान हसीं
बन के गुल सीना-ए-गुलशन पे उभर जाते हैं

जान दे देते हैं जो बात के होते हैं धनी
और होंगे जो ज़बाँ दे के मुकर जाते हैं

ले के उम्मीद यहाँ आए थे क्या क्या 'रौनक़'
आप की बज़्म से क्या ले के असर जाते हैं
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