कौन किस का यहाँ आज मेहमान है
आदमी आदमी से परेशान है
आदमी आदमी से परेशान है
रात भी चाँद भी नींद भी है यहाँ
आज सोना यहाँ कितना आसान है
जश्न वो जीत का है मनाता यहाँ
कल के उस हार से आज अनजान है
लोग इतराते हैं कौन सी बात पर
ख़ाक है सब यहाँ झूठी हर शान है
बात तक वो नहीं कर सका क्या हुआ
कल तलक कहता था जो मुझे जान है
और क्या देखना रह गया है ख़ुदा
बे-ख़बर दर्द से कौन इंसान है
साँस आती नहीं है हवा में मुझे
इस से बेहतर तो मेरा ये ज़िंदान है
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तिरा जो हाथ था
में अब खड़ा हूँ मैं
में अब खड़ा हूँ मैं
लगे है अब ज़माने से बड़ा हूँ मैं
कभी तो खोल कर तू देख दरवाज़े
तिरी दहलीज़ पर कब से पड़ा हूँ मैं
कभी कुछ तो मिरी भी सुन लिया कर तू
न जाने कब से इक ज़िद पर अड़ा हूँ मैं
न बंदूकें न तलवारे न शमशीरें
न जाने जंग वो कैसे लड़ा हूँ मैं
मुझे तू मारता है रोज़ पत्थर से
कभी मैं ने कहा था इक घड़ा हूँ मैं
Read Fullकभी तो खोल कर तू देख दरवाज़े
तिरी दहलीज़ पर कब से पड़ा हूँ मैं
कभी कुछ तो मिरी भी सुन लिया कर तू
न जाने कब से इक ज़िद पर अड़ा हूँ मैं
न बंदूकें न तलवारे न शमशीरें
न जाने जंग वो कैसे लड़ा हूँ मैं
मुझे तू मारता है रोज़ पत्थर से
कभी मैं ने कहा था इक घड़ा हूँ मैं
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धीरे धीरे
ज़िंदगी ये कट रही है धीरे-धीरे
मौत सब में बँट रही है धीरे-धीरे
इस तरफ़ से मैं चलूँ
उस तरफ़ से तुम चलो
फिर यहीं पर हम मिलेंगे धीरे धीरे
इस तरह से काट लेंगे हम सफ़र ये
धीरे धीरे
बस यही है इल्तिजा तुम से ये मेरी
तुम न कहना अलविदा हम से कभी भी
अलविदा ये मारता है धीरे धीरे
रूह तक को काटता है धीरे धीरे
है बहुत लम्बा सफ़र मैं जानता हूँ
पर मैं भी तो चल रहा हूँ धीरे धीरे
ज़िंदगी के इस सफ़र में
हम कभी इस शहर में
जो ठहरने लग गए
तो समझ लेना कि वो घर आ गया है
सो सके हम जिस जगह पर चैन से अब
मौत भी हम को लगा ले जो गले अब
इस तरह से ख़त्म हो अपना सफ़र ये
धीरे धीरे
Read Fullमौत सब में बँट रही है धीरे-धीरे
इस तरफ़ से मैं चलूँ
उस तरफ़ से तुम चलो
फिर यहीं पर हम मिलेंगे धीरे धीरे
इस तरह से काट लेंगे हम सफ़र ये
धीरे धीरे
बस यही है इल्तिजा तुम से ये मेरी
तुम न कहना अलविदा हम से कभी भी
अलविदा ये मारता है धीरे धीरे
रूह तक को काटता है धीरे धीरे
है बहुत लम्बा सफ़र मैं जानता हूँ
पर मैं भी तो चल रहा हूँ धीरे धीरे
ज़िंदगी के इस सफ़र में
हम कभी इस शहर में
जो ठहरने लग गए
तो समझ लेना कि वो घर आ गया है
सो सके हम जिस जगह पर चैन से अब
मौत भी हम को लगा ले जो गले अब
इस तरह से ख़त्म हो अपना सफ़र ये
धीरे धीरे
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तस्वीर
बड़े ही ग़ौर से देखें तिरी तस्वीर हम जैसे
कि शायद ये किसी दिन बात कर के कुछ कहे हम से
कि शायद हँस पड़े ये और फिर देखे नज़र भर के
कहीं तस्वीर से बाहर निकल कर वो
मिरे नज़दीक बैठे और छू कर कुछ असर कर दे
ये पलकों पर छुपे से दफ़्न अश्कों को अमर कर दे
कि बह ले आज फिर सारी हया को छोड़ कर
कि बह ले आज फिर नाते सभी से तोड़ कर
वे अपनी गोद में सर रख के मेरा जो
कभी चू
में ज़रा सा गाल मेरा वो
कभी पूछे ज़रा सा हाल मेरा वो
कि कैसे हम ने दिन ये सब गुज़ारे हैं
हमेशा हर घड़ी हर दिन तुझे ही बस पुकारे हैं
मगर तू तो कभी तस्वीर से बाहर न आ पाई
कभी भी तू निकल कर सामने आ ही नहीं पाई
किसी दिन हम तिरी तस्वीर देखें और ये सोचें
कि ये तस्वीर ज़िंदा हो सके कैसे
Read Fullकि शायद ये किसी दिन बात कर के कुछ कहे हम से
कि शायद हँस पड़े ये और फिर देखे नज़र भर के
कहीं तस्वीर से बाहर निकल कर वो
मिरे नज़दीक बैठे और छू कर कुछ असर कर दे
ये पलकों पर छुपे से दफ़्न अश्कों को अमर कर दे
कि बह ले आज फिर सारी हया को छोड़ कर
कि बह ले आज फिर नाते सभी से तोड़ कर
वे अपनी गोद में सर रख के मेरा जो
कभी चू
में ज़रा सा गाल मेरा वो
कभी पूछे ज़रा सा हाल मेरा वो
कि कैसे हम ने दिन ये सब गुज़ारे हैं
हमेशा हर घड़ी हर दिन तुझे ही बस पुकारे हैं
मगर तू तो कभी तस्वीर से बाहर न आ पाई
कभी भी तू निकल कर सामने आ ही नहीं पाई
किसी दिन हम तिरी तस्वीर देखें और ये सोचें
कि ये तस्वीर ज़िंदा हो सके कैसे
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ख़ुश कहाँ हैं उस ख़ुदा की अब इबादत करने वाले
हँस रहे हैं बे-वजह तुम से मोहब्बत करने वाले
हँस रहे हैं बे-वजह तुम से मोहब्बत करने वाले
क्या बचा कर ज़िंदगी को जीत लेंगे हम उसे भी
ना-समझ हैं ज़िंदगी की ये हिफ़ाज़त करने वाले
किस तरह से चल रहा है चाल वे अपनी ये देखो
क्या अजब हैं लोग वो जो हैं शराफ़त करने वाले
हैं बहुत से दर्द शिकवे ग़म परेशानी यहाँ पर
रूठ कर बैठे हुए हैं ख़ुद इनायत करने वाले
तुम गले मिलना किसी से तो ज़रा बच के ही मिलना
पास रहते हैं तिरे सारे बग़ावत करने वाले
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हमें अभी तक नहीं मिला रात का सितारा
अभी यहीं थी ज़मीन अभी खो गया किनारा
अभी यहीं थी ज़मीन अभी खो गया किनारा
बड़े ही मुद्दत के बा'द हम घर में चैन से थे
किसी की आवाज़ ने हमें आज फिर पुकारा
हमें पता ही नहीं चला और हो गया ये
किसी ग़मों ने हमें रुलाया नहीं दोबारा
हमें लगा था कि कुछ न कुछ फ़ाइदा करेगा
मगर तेरी याद ने दिया है बड़ा खसारा
हमारे घर की छतें टपकती रही हमेशा
नहीं मिला आज तक किसी रंग का सहारा
तेरी किसी बात पर हमें डर लगा बहुत ही
इसीलिए अब हमें न हो बात वो गवारा
'विशेष' तू किस तरह से ये जंग हार आया
खड़ा मिला था रक़ीब जो सामने हमारा
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कभी तो मिरी तू दवा दे
मुझे बस मोहब्बत जता दे
मुझे बस मोहब्बत जता दे
सबेरे नहीं हो रही है
अभी चाँद को तू रिहा दे
नहीं लौटना अब हमें है
सभी मोमबत्ती बुझा दे
छिपा क्या रहा है वो मुझ से
ज़रा आज इतना बता दे
नहीं जानते रास्ते हम
मुझे मय-कदे का पता दे
मुझे भूलने हैं ये चेहरे
मुझे आइना तू दिखा दे
यहाँ बस तुझे जो हैं आते
हमें भी हुनर वो सिखा दे
परेशान हूँ शोर से मैं
ज़रा गीत कोई सुना दे
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