Vishesh asthana

Top 10 of Vishesh asthana

    कौन किस का यहाँ आज मेहमान है
    आदमी आदमी से परेशान है

    रात भी चाँद भी नींद भी है यहाँ
    आज सोना यहाँ कितना आसान है

    जश्न वो जीत का है मनाता यहाँ
    कल के उस हार से आज अनजान है

    लोग इतराते हैं कौन सी बात पर
    ख़ाक है सब यहाँ झूठी हर शान है

    बात तक वो नहीं कर सका क्या हुआ
    कल तलक कहता था जो मुझे जान है

    और क्या देखना रह गया है ख़ुदा
    बे-ख़बर दर्द से कौन इंसान है

    साँस आती नहीं है हवा में मुझे
    इस से बेहतर तो मेरा ये ज़िंदान है
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    रोज़ इक काम रह जाता है
    जब तिरा नाम रह जाता है

    जिस्म बिकता यहाँ रात भर
    रूह का दाम रह जाता है

    चैन से बैठ तो लेते हैं
    बस ये आराम रह जाता है

    हाल तो भेजता है मगर
    एक पैग़ाम रह जाता है

    नाम अपना बनाने में भी
    कोई गुमनाम रह जाता है
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    Vishesh asthana
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    तिरा जो हाथ था
    में अब खड़ा हूँ मैं
    लगे है अब ज़माने से बड़ा हूँ मैं

    कभी तो खोल कर तू देख दरवाज़े
    तिरी दहलीज़ पर कब से पड़ा हूँ मैं

    कभी कुछ तो मिरी भी सुन लिया कर तू
    न जाने कब से इक ज़िद पर अड़ा हूँ मैं

    न बंदूकें न तलवारे न शमशीरें
    न जाने जंग वो कैसे लड़ा हूँ मैं

    मुझे तू मारता है रोज़ पत्थर से
    कभी मैं ने कहा था इक घड़ा हूँ मैं
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    हवस-परस्त तो नहीं तअल्लुक़ात तुम से ये
    कि उम्र इक गुज़ार दूँ ये इक ज़रा से बोसे पे
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    धीरे धीरे
    ज़िंदगी ये कट रही है धीरे-धीरे
    मौत सब में बँट रही है धीरे-धीरे
    इस तरफ़ से मैं चलूँ
    उस तरफ़ से तुम चलो
    फिर यहीं पर हम मिलेंगे धीरे धीरे
    इस तरह से काट लेंगे हम सफ़र ये
    धीरे धीरे
    बस यही है इल्तिजा तुम से ये मेरी
    तुम न कहना अलविदा हम से कभी भी
    अलविदा ये मारता है धीरे धीरे
    रूह तक को काटता है धीरे धीरे
    है बहुत लम्बा सफ़र मैं जानता हूँ
    पर मैं भी तो चल रहा हूँ धीरे धीरे
    ज़िंदगी के इस सफ़र में
    हम कभी इस शहर में
    जो ठहरने लग गए
    तो समझ लेना कि वो घर आ गया है
    सो सके हम जिस जगह पर चैन से अब
    मौत भी हम को लगा ले जो गले अब
    इस तरह से ख़त्म हो अपना सफ़र ये
    धीरे धीरे
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    Vishesh asthana
    6
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    तस्वीर
    बड़े ही ग़ौर से देखें तिरी तस्वीर हम जैसे
    कि शायद ये किसी दिन बात कर के कुछ कहे हम से
    कि शायद हँस पड़े ये और फिर देखे नज़र भर के
    कहीं तस्वीर से बाहर निकल कर वो
    मिरे नज़दीक बैठे और छू कर कुछ असर कर दे
    ये पलकों पर छुपे से दफ़्न अश्कों को अमर कर दे
    कि बह ले आज फिर सारी हया को छोड़ कर
    कि बह ले आज फिर नाते सभी से तोड़ कर
    वे अपनी गोद में सर रख के मेरा जो
    कभी चू
    में ज़रा सा गाल मेरा वो
    कभी पूछे ज़रा सा हाल मेरा वो
    कि कैसे हम ने दिन ये सब गुज़ारे हैं
    हमेशा हर घड़ी हर दिन तुझे ही बस पुकारे हैं

    मगर तू तो कभी तस्वीर से बाहर न आ पाई
    कभी भी तू निकल कर सामने आ ही नहीं पाई
    किसी दिन हम तिरी तस्वीर देखें और ये सोचें
    कि ये तस्वीर ज़िंदा हो सके कैसे
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    Vishesh asthana
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    ख़ुश कहाँ हैं उस ख़ुदा की अब इबादत करने वाले
    हँस रहे हैं बे-वजह तुम से मोहब्बत करने वाले

    क्या बचा कर ज़िंदगी को जीत लेंगे हम उसे भी
    ना-समझ हैं ज़िंदगी की ये हिफ़ाज़त करने वाले

    किस तरह से चल रहा है चाल वे अपनी ये देखो
    क्या अजब हैं लोग वो जो हैं शराफ़त करने वाले

    हैं बहुत से दर्द शिकवे ग़म परेशानी यहाँ पर
    रूठ कर बैठे हुए हैं ख़ुद इनायत करने वाले

    तुम गले मिलना किसी से तो ज़रा बच के ही मिलना
    पास रहते हैं तिरे सारे बग़ावत करने वाले
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    Vishesh asthana
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    हमें अभी तक नहीं मिला रात का सितारा
    अभी यहीं थी ज़मीन अभी खो गया किनारा

    बड़े ही मुद्दत के बा'द हम घर में चैन से थे
    किसी की आवाज़ ने हमें आज फिर पुकारा

    हमें पता ही नहीं चला और हो गया ये
    किसी ग़मों ने हमें रुलाया नहीं दोबारा

    हमें लगा था कि कुछ न कुछ फ़ाइदा करेगा
    मगर तेरी याद ने दिया है बड़ा खसारा

    हमारे घर की छतें टपकती रही हमेशा
    नहीं मिला आज तक किसी रंग का सहारा

    तेरी किसी बात पर हमें डर लगा बहुत ही
    इसीलिए अब हमें न हो बात वो गवारा

    'विशेष' तू किस तरह से ये जंग हार आया
    खड़ा मिला था रक़ीब जो सामने हमारा
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    Vishesh asthana
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    कभी तो मिरी तू दवा दे
    मुझे बस मोहब्बत जता दे

    सबेरे नहीं हो रही है
    अभी चाँद को तू रिहा दे

    नहीं लौटना अब हमें है
    सभी मोमबत्ती बुझा दे

    छिपा क्या रहा है वो मुझ से
    ज़रा आज इतना बता दे

    नहीं जानते रास्ते हम
    मुझे मय-कदे का पता दे

    मुझे भूलने हैं ये चेहरे
    मुझे आइना तू दिखा दे

    यहाँ बस तुझे जो हैं आते
    हमें भी हुनर वो सिखा दे

    परेशान हूँ शोर से मैं
    ज़रा गीत कोई सुना दे
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