अभी अभी तो हटा था ख़याल माज़ी का
किसी ने पूछ लिया फिर सवाल माज़ी का
ये रात कट न सकी आँख मूँद लेने से
सो कोई ज़िक्र या क़िस्सा निकाल माज़ी का
हर एक साल गुज़िश्ता ही साल जैसा है
शिकन है माथे पे दिल में ख़याल माज़ी का
तो इतना वक़्त बचाकर करेगा क्या उस का
वो शख़्स जिस को नहीं है मलाल माज़ी का
किया था जितना मुझे इस्तिमाल माज़ी ने
बस उतना मैं ने किया इस्तिमाल माज़ी का
अब इस के आगे कोई रास्ता नहीं दिखता
ये ब्लैक होल है या कोई जाल माज़ी का
— Yamir Ahsan















