एक दम पाक हो गया हूँ मैं
ख़ाक था ख़ाक हो गया हूँ मैं
इश्क़ में डूबना ही छोड़ दिया
अच्छा तैराक हो गया हूँ मैं
तुम थे तो खौफ़ था, तुम्हें खो कर
कितना बेबाक हो गया हूँ मैं
तीर सबने चलाए हैं मुझ पर
आम सा ताक हो गया हूँ मैं
मैं किसी पर भी जच नहीं पाता
कैसा पोशाक हो गया हूँ मैं
— Yamir Ahsan















