ziyaada kuchh nahin himmat to kar hi sakte hain | ज़ियादा कुछ नहीं हिम्मत तो कर ही सकते हैं

  - Zia Mazkoor

ज़ियादा कुछ नहीं हिम्मत तो कर ही सकते हैं
इक अच्छे काम की नीयत तो कर ही सकते हैं

ख़ुदा के हाथ से लिक्खा मुक़द्दर अपनी जगह
हम उसके बन्दे हैं मेहनत तो कर ही सकते हैं

ग़रीब लोग मरम्मत न कर सकें तो क्या
शिकस्ता घर की हिफ़ाज़त तो कर ही सकते हैं

हमारे बच्चे इजाज़त तलब नहीं करते
मगर बताने की ज़हमत तो कर ही सकते हैं

हज़ारों साल गुज़ारे हैं मुक़तदी रह कर
इक-आध बार इमामत तो कर ही सकते हैं

तो क्या हुआ जो शरीके-हयात बन न सके
तुम्हारी शादी में शिरकत तो कर ही सकते हैं

  - Zia Mazkoor

Mehndi Shayari

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