दिल चुरा कर गया दिल लगा कर गयाग़म का नग़्मा यहाँ गुनगुना कर गयाकोई तो राज़ दिल में दबाए वो थाजो भी अपनी वफ़ा को मिटा कर गया— Zohair Ahmad Sahil