वो क्या है कि फूलो को धोखा हुआ था
तेरा सूट तितली ने पहना हुआ था
मुझे क्या पता बाढ़ में कौन डूबा
मैं कश्ती बनाने में डूबा हुआ था
मैं शायद उसी हाथ में रह गया हूँ
वही हाथ जो मुझ से छूटा हुआ था
किसी की जगह पर खड़ा हो गया मैं
मेरी सीट पर कोई बैठा हुआ था
पुरानी ग़ज़ल डस्टबिन में पड़ी थी
नया शे'र टेबल पे रक्खा हुआ था
तुम्हें देख कर कुछ तो भूला हुआ हूँ
अरे याद आया मैं रूठा हुआ था
— Zubair Ali Tabish















