jaate kahii vo jab nazar aane laga | जाते कहीं वो जब नज़र आने लगा

  - 100rav

जाते कहीं वो जब नज़र आने लगा
हाँ गूँगा भी फिर देखकर गाने लगा

सब लोग हैराँ हो गए ये देखकर
जब देखने को अंधा भी जाने लगा

आवाज़ छम छम जब लगी यूँँ गूँजने
नज़दीक बहरा कान भी लाने लगा

उसकी नज़र में बस नज़र आ जाने को
गंजा भी अपने बाल सहलाने लगा

बस उसकी सूरत देखने ख़ातिर कोई
लँगड़ा था पर पैरों को दौड़ाने लगा

साज़िश दुपट्टे ने हवा से मिल के की
आँचल ज़ियादा तब सितम ढाने लगा

फिर चाँद ने की ये शिकायत या ख़ुदा
मैं चाँद हूँ वो कैसे कहलाने लगा

माना नहीं लिख पाता सौरभ अच्छा पर
पढ़ कर ये सबको याद वो आने लगा

  - 100rav

Zulf Shayari

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