kaanpa tha KHuda bhi tab ye qahar banaane men | काँपा था ख़ुदा भी तब ये क़हर बनाने में

  - 100rav

काँपा था ख़ुदा भी तब ये क़हर बनाने में
ये 'इश्क़ बनाकर फिर ये दहर बनाने में

घर डूबे हैं लोगों के इस भारी सुनामी में
वो चाँद ही है शामिल ये लहर बनाने में

सब गाँव हैं वीराँ अब और पूछता है शहरी
क्या हाथ है इनका भी ये शहर बनाने में

यारी है मुहब्बत से और दर्दस है शानी
मंथन में था अमृत ही ये ज़हर बनाने में

इन शाइरों में होता इक नाम ये सौरभ भी
मेहनत न कोई करता जो बहर बनाने में

  - 100rav

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