हम ऐसा इश्क़ करने जा रहे हैं

जिसे कर के सभी पछता रहे हैं

हमीं हैं जो कि सब को जानते थे
हमीं अब सब से धोखा खा रहे हैं

वफ़ा के वादे वो करती है हरदम
सो सारे वादे हम लिखवा रहे हैं

क़रीब इतने हैं कैसे लें न बोसा
सितम ये है कि वो शर्मा रहे हैं

कहाँ फ़ुर्सत उन्हें हम को मनाएँ
हम अपने दिल को ख़ुद समझा रहे हैं

यही हर बार का जुमला है उस का
सुनो माँ घर पे है हम जा रहे हैं

— ATUL SINGH

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