जो हाल था मेरा वो बताया नहीं गया
कहना नहीं था जो वो छुपाया नहीं गया
नफ़रत सी हो गई है उसे नाम से मेरे
लेकिन जहाँ लिखा था मिटाया नहीं गया
इक जाँ-ब-लब चराग़ को रब की तलाश थी
ऐसा दिया हवा से बुझाया नहीं गया
यां कोई अब तलक न मेरा मो’तबर हुआ
लायक हमारे शख़्स बनाया नहीं गया
वा'दा किया था उम्र निभाने का साथ में
वा'दा वो चंद रोज़ निभाया नहीं गया
सीने का ज़ख़्म यार से देखा नहीं गया
औेर दिल का ज़ख़्म हम सेे दिखाया नहीं गया
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