Aditya
Aditya
Ghazal

जो हाल था मेरा वो बताया नहीं गया

कहना नहीं था जो वो छुपाया नहीं गया

नफ़रत सी हो गई है उसे नाम से मेरे
लेकिन जहाँ लिखा था मिटाया नहीं गया

इक जाँ-ब-लब चराग़ को रब की तलाश थी
ऐसा दिया हवा से बुझाया नहीं गया

यां कोई अब तलक न मेरा मो’तबर हुआ
लाइक़ हमारे शख़्स बनाया नहीं गया

वा'दा किया था उम्र निभाने का साथ में
वा'दा वो चंद रोज़ निभाया नहीं गया

सीने का ज़ख़्म यार से देखा नहीं गया
औेर दिल का ज़ख़्म हम से दिखाया नहीं गया

— Aditya

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