आप यहाँ किस के शैदाई
अपनी जान वही तन्हाई
गलियों में ये शोर है कैसा
और बताओ वो कब आई
दिल की जानिब चल निकले थे
रस्ते में फिर मुँह की खाई
नाम था तेरा बड़ा मुसव्विर
ख़ाक मिरी तस्वीर बनाई
ज़िंदा हैं पर ख़ाक हैं ज़िंदा
जिन से मौत नहीं टकराई
दरिया भी चुप हो जाएँ जब
मतलब तुम समझे ना भाई
— Aqib khan















