aata gaya naya to puraana chala gaya | आता गया नया तो पुराना चला गया

  - Aqib khan

आता गया नया तो पुराना चला गया
मैं अपने नक़्शे पा को मिटाता चला गया

तुम जो गए हो यार ज़माना चला गया
तुम पूछते हो मुझ सेे कि क्या क्या चला गया

लिखना कि इंतिज़ार तो करता बहुत था वो
आएँ जो पूछने तो बताना चला गया

इक शख़्स इस क़दर मेरे सर पर सवार था
इक नाम बार बार अलापा चला गया

मुश्किल से एक नाम जो दिल पर लिखा था दोस्त
मुश्किल हुए बिना ही वो मिटता चला गया

दोनों ने तय किया था कि ठहरेंगे एक साथ
पीछे न देखा उसने वो चलता चला गया

  - Aqib khan

Intezaar Shayari

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