जैसे ही होती है बरसात की आवाजाहीतेज़ हो जाती है जज़्बात की आवाजाहीपेड़ पौधों को ही बस दोष न देना यारोंहोती है मुझमें भी इक ज़ात की आवाजाही— Aqib khan