गर तुम्हें डर लग रहा है प्यार में इज़हार से
तो तुम्हारा काम होगा मीर के अश'आर से
जब तलक रहता हूँ मैं लम्बे सफ़र पे तब तलक
माँ की साँसे भी हैं चलती ट्रेन की रफ़्तार से
हाँ वही अकबर कि जिस के सामने सब झुक गए
देखो जोधा के है आगे हो गए लाचार से
— Alankrat Srivastava















