कभी उन से दिल तुम मिला कर तो देखो
पिता को गले से लगा कर तो देखो
वो आवाज़ जो तुम को रोके हुए है
वो आवाज़ सब को सुना कर तो देखो
अब इस क़ैद की तोड़ दो सब सलाख़ें
परिन्दों सा ख़ुद को उड़ा कर तो देखो
मेरे पास बैठो तो मुझ को यक़ीं हो
कभी रुख़ से पर्दा हटा कर तो देखो
वो गाँठें जो दिल में हैं खुलने लगेंगी
ज़रा रंग-ए-महफ़िल सजा कर तो देखो
अमान आज फिर बात बढ़ने लगेगी
नज़र से नज़र तुम मिला कर तो देखो
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