बिछड़कर तुम से अब दिलदार जानी
हुआ जीना मेरा दुश्वार जानी
मिटा दोगे पुरानी चैट को तुम
करोगे या उसे अख़बार जानी
मुझे तन्हाइयाँ भाती नहीं हैं
गिरा दूँगा सभी दीवार जानी
खुबानी सेब से भी लाल मीठे
रसीले हैं लबो रुख़्सार जानी
उड़ेंगे आसमाँ में हम किसी दिन
करेंगे तब तेरा दीदार जानी
मुहब्बत की गली से ही गुज़र कर
पढ़े ग़ालिब कभी गुलज़ार जानी
बुरे दिन हैं कभी अच्छे भी होंगे
सभी होते कभी दो चार जानी
कभी ग़ालिब कभी जावेद को मैं
कभी पढ़ता भगत सरदार जानी
मुहब्बत से बड़ा कुछ भी नहीं है
समझता ही नहीं संसार जानी
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