bichadkar tum se ab dildaar jaani | बिछड़कर तुम से अब दिलदार जानी

  - Prashant Arahat

बिछड़कर तुम से अब दिलदार जानी
हुआ जीना मेरा दुश्वार जानी

मिटा दोगे पुरानी चैट को तुम
करोगे या उसे अख़बार जानी

मुझे तन्हाइयाँ भाती नहीं हैं
गिरा दूँगा सभी दीवार जानी

खुबानी सेब से भी लाल मीठे
रसीले हैं लबो रुख़्सार जानी

उड़ेंगे आसमाँ में हम किसी दिन
करेंगे तब तेरा दीदार जानी

मुहब्बत की गली से ही गुज़र कर
पढ़े ग़ालिब कभी गुलज़ार जानी

बुरे दिन हैं कभी अच्छे भी होंगे
सभी होते कभी दो चार जानी

कभी ग़ालिब कभी जावेद को मैं
कभी पढ़ता भगत सरदार जानी

मुहब्बत से बड़ा कुछ भी नहीं है
समझता ही नहीं संसार जानी

  - Prashant Arahat

Mehboob Shayari

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