"कुछ और बात है"
दिन भी है मगर रात की कुछ और बात है
उन से उस मुलाक़ात की कुछ और बात है
यूँ तो छुए गए है कई जिस्म मुसलसल
उन को जो छुआ जाए तो कुछ और बात है
काँटे अगर चुभे तो, उन की ख़ता है क्या
जो फूल चुभ रहे हो तो कुछ और बात है
— Aryan Goswami
दिन भी है मगर रात की कुछ और बात है
उन से उस मुलाक़ात की कुछ और बात है
यूँ तो छुए गए है कई जिस्म मुसलसल
उन को जो छुआ जाए तो कुछ और बात है
काँटे अगर चुभे तो, उन की ख़ता है क्या
जो फूल चुभ रहे हो तो कुछ और बात है
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