जब सितारों की चमक खो जाएगी

तीरगी की तब झिझक खो जाएगी

तुम ख़िज़ाँ की ख़ूबियाँ तब देखना
जब गुलिस्ताँ की महक खो जाएगी

कर दिया गर क़ैद पिंजरों में इन्हें
घर से चिड़ियों की चहक खो जाएगी

चाहतों के जा़विए से देखिए
दिल में जो है सब कसक खो जाएगी

रख जमा कर अपनी मंज़िल पे नज़र
वर्ना मंज़िल की सड़क खो जाएगी

नाम ग़ज़लों से तेरा जब जाएगा
इस्तिआरों की चमक खो जाएगी

गर जड़ों में जंग यूँ जारी रही
नर्म शाख़ों की लचक खो जाएगी

— Avinash Joshi

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