kab tak bhala ye dil mira huzn–e–dagaa kare | कब तक भला ये दिल मिरा हुज़्न–ए–दग़ा करे

  - Abhishek Bhadauria 'Abhi'

कब तक भला ये दिल मिरा हुज़्न–ए–दग़ा करे
मुझको ख़ुदा कोई तो नया ग़म अता करे

जलता है जिस तरह किसी दहलीज़ पे चराग़
दिल भी किसी की याद में शब भर जला करे

मसरूफ़ हैं सभी यहाँ अपने ही आप में
चाहे भी एक शख़्स तो किस सेे गिला करे

पूरी न हो सकीं जो मिरी ख़्वाहिशें तो क्या
तेरी तमाम ख़्वाहिशें पूरी ख़ुदा करे

मैं चाहता हूँ मुझको मिले ज़ख़्म फिर वही
मैं चाहता हूँ फिर कोई अहद–ए–वफ़ा करे

अंजाम हो तिरा भी ‘अभी’ क़ैस की तरह
तू भी किसी की चाह में दर दर फिरा करे

  - Abhishek Bhadauria 'Abhi'

Khuda Shayari

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