ye kaisa mod ab aaya hai zindagaani men | ये कैसा मोड़ अब आया है ज़िंदगानी में

  - Abhishek Bhadauria 'Abhi'

ये कैसा मोड़ अब आया है ज़िंदगानी में
कि आ रहा है मज़ा कार–ए–जाँ–सितानी में

उसी तरह मिली है ज़िंदगी में तन्हाई
मिले है जैसे सुरूर–ए–शराब पानी में

तमाम 'उम्र रहे हम तलाश में जिस की
सुकून हम को मिला है वो शे'र-ख़्वानी में

नवाज़िशें हैं किसी की किसी की क़ुर्बानी
मेरा ही ज़िक्र नहीं है मेरी कहानी में

शरीक–ए–जुर्म ने फ़र्द-ए-हिसाब देख कहा
सज़ा–ए–मौत 'अता की है मेहरबानी में

गुज़र रहे हैं सुकूँ में किसी के शाम–ओ–सहर
भटक रहा है कोई दश्त–ए–ला–मकानी में

नज़र जो आ रहा है आप को है और कोई
गुज़र चुका है ‘अभी’ मर्ग–ए–ना–गहानी में

  - Abhishek Bhadauria 'Abhi'

Zindagi Shayari

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