थोड़ा भी इख़्बात नहीं हैतेरी अच्छी ज़ात नहीं हैइत ने उम्दा लोगों में तोमेरी कुछ औक़ात नहीं हैउस के साथ कटेगी कैसेजब वस्फ़-ए-इंसात नहीं हैकाश तू पहले मिलता हम कोअब हम में वो बात नहीं है— Daqiiq Jabaalii