थोड़ा भी इख़्बात नहीं है
तेरी अच्छी ज़ात नहीं है
इत ने उम्दा लोगों में तो
मेरी कुछ औक़ात नहीं है
उस के साथ कटेगी कैसे
जब वस्फ़-ए-इंसात नहीं है
काश तू पहले मिलता हम को
अब हम में वो बात नहीं है
— Daqiiq Jabaalii
तेरी अच्छी ज़ात नहीं है
इत ने उम्दा लोगों में तो
मेरी कुछ औक़ात नहीं है
उस के साथ कटेगी कैसे
जब वस्फ़-ए-इंसात नहीं है
काश तू पहले मिलता हम को
अब हम में वो बात नहीं है
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