हम ने नाकाम मुहब्बत का गला घोंट दियादिल से उठती हुई चाहत का गला घोंट दियाबे-वफ़ा वो न था मा'लूम था मुझ को लेकिनइक फ़साने ने हक़ीक़त का गला घोंट दिया— Dard Faiz Khan