"रंजिशें"

बात क्या हुई क्या ख़बर क्या हुई
हम से यूँ ही अपने खफ़ा हो चले हैं
जिन्हें देखते हैं हम उम्मीद भरी निगाहों से
उन की नज़र में हम फ़ना हो चले हैं

कुछ हम से इल्तज़ा कर दे ऐ जाने वाले
या गीले शिकवे बयाँ कर दे सताने वाले
अयाँ कर दे सारी ख़ामियाँ, सारी ख़ामोशियाँ
बता दे सारे क़िस्से दास्ताँ कहानियाँ

कुछ तो हुआ होगा किसी ने कुछ कहा होगा
ऐसे ही कोई अपना रवैया नहीं बदलता
ख़ामोश नहीं रहता, उदास नहीं चलता
कुछ पता ही नहीं कैसे क्या दूर करूँ गीले-शिकवे
तू बेहद अजीज़ हैं मेरे, दिल से हैं तुझ से रिश्ते

जाना मेरी, तू पेश कर अपनी नाराज़ियों का सबब
मैं दूर कर दूँगा सारी रंजिशें अभी आज़ और अब

— Deep kamal panecha

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Aankhein Shayari

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