दिल के ज़ख़्मों की निशानी और है
ख़ून सा आँखों में पानी और है
जान देते थे फ़क़त इक बात पर
वो जवानी ये जवानी और है
कर लिया वा'दा तो फिर सोचा नहीं
बात मेरी ख़ानदानी और है
फ़ैसले उस के सदा होते सही
मेरे रब की हुक्मरानी और है
भूख, दौलत या के शौहरत की नहीं
शे'र का मेरे मआ'नी और है
प्यार है लालो-गुहरस आप को
हाँ मगर मेरी कहानी और है
दिख रहा जैसा नहीं वैसा 'धरम'
इस हक़ीक़त में कहानी और है
— Dharamraj deshraj















