dard ko samjha ke thoda aur qaabil sa banaya | दर्द को समझा के थोड़ा और क़ाबिल सा बनाया

  - "Dharam" Barot

दर्द को समझा के थोड़ा और क़ाबिल सा बनाया
टूट जाने वाले रिश्ते को भी ऐसे था निभाया

रास्ता अंधे को हर कोई दिखाता है यहाँ पर
रास्ता अंधा समझने वालों को हमने दिखाया

रूठ ने का ढोंग करने में मज़ा आता उसे और
सच में रूठा मान कर हमने उसे हर दिन मनाया

अब मुझे भी जाना है परदेस में थोड़ा कमाने
जानना था आपने घर छोड़ कर क्या क्या गँवाया

छाप रखकर इंडिया की चाँद पर वैज्ञानिकों ने
आज के दिन और इक इतिहास इसरो ने रचाया

  - "Dharam" Barot

Masti Shayari

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