ग़म का तमाशा या किया था सच का ही इक़रार यार
जो भी किया था अपनों को करना नहीं था वार यार
बच्चे मेरे हो तेरे जैसे कहता हूँ हर बार ये
इससे ज़ियादा क्या ही होगा तेरा मेरा प्यार यार
तू देख कर भी मिल नहीं पाता तेरा ग़म है मगर
इससे बुरा था वक़्त लिख कर देख थोड़े तार यार
ये बैठ कर रो लेने वाला काम सच में अच्छा है
रखकर घुटन अंदर ही अंदर मरता कितनी बार यार
हम लोकशाही में दिखावा अच्छे से कर लेते हैं
पचती नहीं सच में किसी को होती है जब हार यार
माँ-बाप से मिलती दुआओं का ही है सारा असर
कर देता हूँ हर इक मुसीबत चुटकी में ही पार यार
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