ranj sabko hi koi bhi saath men kab tha dharm | रंज सबको ही कोई भी साथ में कब था धरम

  - "Dharam" Barot

रंज सबको ही कोई भी साथ में कब था धरम
जानना ये अच्छे से था साथ में रब था धरम

इतने अच्छे लोग सतयुग में नहीं होंगे कभी
जो कहेंगे काम से ही तुझ सेे मतलब था धरम

साल पूरे बीस गुज़रे राह में तेरे ही है
सुनने को ये पास में कोई मेरे कब था धरम

ज़िंदगी में मेरी ख़ुश हूँ और ये दिखता भी है
हाँ मगर कहना ग़लत है पास में सब था धरम

उसकी मर्ज़ी बिन नहीं हिलता है पत्ता भी यहाँ
और तू ये कहता है तेरा ये करतब था धरम

  - "Dharam" Barot

Rahbar Shayari

Our suggestion based on your choice

More by "Dharam" Barot

As you were reading Shayari by "Dharam" Barot

Similar Writers

our suggestion based on "Dharam" Barot

Similar Moods

As you were reading Rahbar Shayari Shayari