"छाले"

किसी के दिखते तो किसी के छुपते
हर इक के होते पाँव के छाले
तोड़ के कंगन बात की थी वफ़ा की
दिख रहे थे मर्द के आँख के छाले
संस्कार के बोझ तले दब जाती
होते है उस के भी रूह के छाले
मर्द और औरत में बट गया था सब
किन्नर ताली बजा कर के दिखाए
ख़ुशी से अपने ही हाथ के छाले
सबकी बात कर अकेला रहता हूँ
देखे कौन मेरे बदन के छाले
किसी के दिखते तो किसी के छिपते
हर इक के होते पाँव के छाले

— "Dharam" Barot

More by "Dharam" Barot

Other nazm from the same pen

See all from "Dharam" Barot →

Aankhein Shayari

Shers of aankhein.

All Aankhein Shayari poetry →

Similar writers

Voices in the same orbit

Browse by mood

Poetry by feeling