"वुजूद"

पेड़ थोड़े पहले काटे जाते थे
घोंसले भी टूट गिर जाते थे
उड़के सारे ही पंछी खो जाते थे
गाँव को फिर शहर घोषित करना था
घर बनाया था वहाँ इंसान ने
कुछ जगह भी छोड़ता था खेलने
उस जगह अब बच्चे हैं खेलते
दूर से इक जाँ थी ये सब देखती
आँख थी ग़मगीन उस की देख कर
उस पे पड़ती है नज़र बच्चे की इक
वो पंछी शायद उन्हीं में से था जो
पेड़ टूटे थे महीनों पहले सब
घोंसला उस का तभी टूटा था यार
बच्चा इक दिन उस को पकड़ लेता है
पिंजरा भी वास्ते उस के था अब
उस को हर दिन अच्छा खाना मिलता था
ख़ुश था या ग़म में पता लगना भी अब
थोड़ा मुश्किल लग रहा है यार अब
बच्चे को ये लग रहा था वो पंछी
को बड़ा ख़ुश रख रहा था बाप को
बच्चा ख़ुश दिखता था आस-पास
जब पंछी के रहता था घर बना
पेड़ का गिरना ये अब मालिक भी और
पिंजरे में रहता पंछी भी सब भूले
बस ग़ुलामी नाम का मतलब यही
बस ज़रा सी ही ख़ुशी पाकर सभी
ये भूल जाते था क्या अपना वुजूद

— "Dharam" Barot

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