दिन भर थकान और बस
दिल में गुमान और बस
क़ाज़ी के हाथ कुछ नहीं
कोई बयान और बस
करने को और कुछ नहीं
उस का बखान और बस
सब कुछ उसी पे मुनहसिर
वो मेहरबान और बस
ये आसमान तेरा है
भर ले उड़ान और बस
अपने दुखों पे रोते हैं
हम ये मकान और बस
— Dileep Kumar
दिल में गुमान और बस
क़ाज़ी के हाथ कुछ नहीं
कोई बयान और बस
करने को और कुछ नहीं
उस का बखान और बस
सब कुछ उसी पे मुनहसिर
वो मेहरबान और बस
ये आसमान तेरा है
भर ले उड़ान और बस
अपने दुखों पे रोते हैं
हम ये मकान और बस
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