दिखने में जो अहल-ए-दिल होते हैं
तेरी महफ़िल में शामिल होते हैं
कुछ को इल्म-ए-ख़ुदा भी होता है और
कुछ हम जैसे भी जाहिल होते हैं
उन का रस्तों से क्या लेना देना
जो सब के ख़िज़्र-ए-मन्ज़िल होते हैं
— Dileep Kumar
तेरी महफ़िल में शामिल होते हैं
कुछ को इल्म-ए-ख़ुदा भी होता है और
कुछ हम जैसे भी जाहिल होते हैं
उन का रस्तों से क्या लेना देना
जो सब के ख़िज़्र-ए-मन्ज़िल होते हैं
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