जब ग़ज़ल से निकल गई दुनिया
मैं ने देखा बदल गई दुनिया
यार अब यार से नहीं मिलते
कैसे इतना बदल गई दुनिया
पहले हँसती थी मुझ पे लेकिन फिर
मेरे रस्ते पे चल गई दुनिया
मुझ को करने हैं अब करिश्में कुछ
इतना सुन के भी जल गई दुनिया
पहले देखा था उड़ रही थी बहुत
अब धरा पर फिसल गई दुनिया
ख़्वाब देखा था ठीक था सब कुछ
फिर अचानक से जल गई दुनिया
— Yash Sharma















