जो मिरे दिल में सजी है वो ग़ज़ल है
और जो सब से छुपी है वो ग़ज़ल है
अब से पहले एक लड़की ज़िंदगी थी
अब जो मेरी ज़िंदगी है वो ग़ज़ल है
एक अरसे तक यही समझा गया था
आशिक़ी जिस
में रही है वो ग़ज़ल है
शा'इरी काफ़ी सुनी होगी अभी तक
पर जो दिल को छू गई है वो ग़ज़ल है
जो ग़ज़ल कहते हैं उन से ये कहो तुम
बहर भी जिस
में सही है वो ग़ज़ल है
सिर्फ़ कुछ लफ़्ज़ों की रचना ही नहीं है
प्यार की जिस
में नदी है वो ग़ज़ल है
सोचता था वो बहुत आसान है पर
जो ग़ज़ल पूरी सही है वो ग़ज़ल है
बात कहते हैं सभी अपनी यहाँ पर
बात जो 'यश' ने कही है वो ग़ज़ल है
— Yash Sharma















