अजीब है कि ज़िंदगी से अलविदा कहा
उसी के साथ हैं उसी से अलविदा कहा
फिर उस के बा'द मेरे दिल ने हार मान ली
किसी ने इतनी सादगी से अलविदा कहा
दिखा दिए जो ज़ख़्म यार रो पड़ोगे तुम
इसी के वास्ते ख़ुशी से अलविदा कहा
डरा नहीं मैं उस से जिस ने शोर कर दिया
मगर के जिस ने ख़ामुशी से अलविदा कहा
वो ट्रेन आ गई फ़क़त ये सोच कर के मैं
ख़ुशी ऋतू पलक सभी से अलविदा कहा
— Divyansh "Dard" Akbarabadi















