जिसे इशारे करना तक मुहाल है

पता है उस से मेरी बोल चाल है

नए सिरे से सब बता शुरू करें
ये तुझ से मेरा आख़िरी सवाल है

उसे लगा कि हाथ में सिंदूर है
मगर मेरे तो हाथ में गुलाल है

तेरी तो ख़्वाहिशें हैं आसमान पर
मुझे लगा था तू भी हम ख़याल है

दिमाग़ का तो तेज़ है ऐ दर्द तू
मगर यहाँ तो दिल का इस्तिमाल है

— Divyansh "Dard" Akbarabadi

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